राजस्थान उपचुनाव में कांग्रेस ने अजमेर व अलवर लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस के उम्मीदवार बीजेपी से आगे निकलते दिख रहे हैं. इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में मंथन शुरू हो गया है कि आखिरकार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने ऐसी क्या खास रणनीति बनाई थी जो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की प्लानिंग पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई. राजस्थान उपचुनाव को जमीनी स्तर पर कवर करने वाले जानकार बताते हैं कि सचिन पायलट ने जातीय समीकरण की जबरदस्त ताना-बाना बुना था, जिसे भेदने में बीजेपी नाकाम साबित हुए. अगर केवल अजमेर लोकसभा सीट की बात करें तो यहां सचिन पायलट की रणनीति को ध्वस्त करने के लिए वसुंधरा सरकार ने पूरी ताकत लगा दी थी, लेकि कामयाबी नहीं मिली.

8 विधायक मिलकर भी कांग्रेस प्रत्याशी को हरा नहीं पाए
अजमेर लोकसभा सीट के तहत विधानसभा की 8 सीटें हैं. इन सभी आठ सीटों पर बीजेपी के विधायक हैं. दूदू- प्रेमचंद, किशनगढ़- भागीरथ चौधरी, पुष्कर- सुरेश सिंह रावत, अजमेर उत्तर- वासुदेव देवनानी, अजमेर दक्षिण- अनिता भदेल, नसीराबाद- सांवर लाल, मसूदा- सुशील कुमार पलाड़ा और केकड़ी सीट से बीजेपी के शत्रुघ्न गौतम विधायक हैं. सीएम वसुंधरा ने इन आठों विधायकों से कहा था कि वे उपचुनाव में दिन रात ड्यूटी करें, लेकिन इनकी रणनीति नाकाम साबित हुई.
Last day of campaigning. Roadshow in Ajmer city in support of congress candidate Dr. Raghu Sharma#AjmerForCongress pic.twitter.com/iK07stdyjq
— Sachin Pilot (@SachinPilot) January 27, 2018
रघु शर्मा के सहारे सचिन पायलट ने चली ये चाल
अजमेर इलाके में मुस्लिम, राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और रावत समुदाय से जुड़े लोग भी बड़ी तादाद में रहते हैं. हालांकि राजपूत समाज के लोग ही निर्णायक रोल निभाते हैं. गैंगस्टर आनंदपाल एनकाउंटर और फिल्म पद्मावत पर बैन नहीं लगने से पूरा राजपूत समाज नाराज है. सचिन ने इस बात को भांपते हुए रघु शर्मा के सहारे राजपूत समाज के एक बड़े तबके को कांग्रेस के पाले में करने में सफल रहे. साथ ही कांग्रेस के पारंपरिक वोटर जाट, मुस्लिम और वैश्य समाज के लोगों को भी एकजुट करने में सफल रहे. इस फॉर्मूले का वसुंधरा के पास कोई काट नहीं था.
Great enthusiasm at the public meeting in Devmali, Masada. Grateful for the affection 🙏 pic.twitter.com/CLtqgPeU68
— Sachin Pilot (@SachinPilot) January 26, 2018
सहानुभूति कार्ड पर भारी पड़ा अयोग्य उम्मीदवार की छवि
अजमेर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने राम स्वरूप लांबा को प्रत्याशी बनाया था. राम स्वरूप पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट के बेटे हैं. सांवरलाल जाट ने अजमेर में बड़ी आबादी वाले जाट समुदाय को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी. वे जाट समाज के कद्दावर नेता माने जाते थे. वहीं अजमेर के लोगों के बीच राम स्वरूप की छवि अयोग्य की है. राम स्वरूप जब राजनीति में आए तो लोग उनमें सांवरलाल की छवि तलाशने लगे, लेकिन पिता की जगह भरने में अयोग्य साबित हुए. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी सहानुभूति कार्ड खेलकर राम स्वरूप के लिए वोट मांगती दिखी.
हालांकि कांग्रेस खेमा सहानुभूति कार्ड पर राम स्वरूप की खराब छवि को डोमिनेट करने में सफल साबित हुई. रामस्वरूप जनता के बीच का नेता नहीं माने जाते हैं. इनकी छवि एसी गाड़ियों में घुमने वाले नेता की है. वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी रघु शर्मा की छवि जननेता की है. रघु शर्मा क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं. वे यहां से विधायक भी रह चुके हैं, जिसके चलते उनकी यहां के लोगों के बीच अच्छी पकड़ है.
