मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सूबे का मुख्यमंत्री घोषित किया गया है। खुद मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कमलनाथ के नाम की घोषणा की गयी। लेकिन कमलनाथ के शपथग्रहण के दो दिन पहले यह मामला एक बार फिर दिल्ली पहुँच गया है। दरअसल कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी प्रदेश की राजनीती में प्रदेश अध्यक्ष जैसा कोई अहम पद दिया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नही। उपमुख्यमंत्री पद सिंधिया ने लिया नही तो वहीं प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए भी अजय सिंह, अरुण यादव और दिग्विजय सिंह तक का नाम चलने लगा। जिसके बाद सिंधिया समर्थक विधायक कमलनाथ सरकार में खुद का असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। ऐसे में यह सभी नेता कुछ विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली स्तिथ ज्योतिरादित्य सिंधिया के निवास के बाहर धरने पर बैठ गए। मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर ,शिवपुरी ,दतिया और भिंड जिले के यह विधायक सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हैं। यह नेता अब यह मांग कर रहे है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।
मध्यप्रदेश से दिल्ली पहुंचे इन विधायकों का कहना है कि जनता ने सिंधिया के नाम पर वोट दिए हैं, भाजपा की कब्जे वाली सीट पर भी सिंधिया के नाम पर जनता ने कांग्रेस को जिताया है, ऐसे में जब सिंधिया को मुख्यमंत्री नही बनाया गया है तो अब हम जनता के बीच किस मुंह से जाएं। विधायकों की मांग है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए| दिल्ली में मौजूद विधायकों का कहना है कि अगर 2019 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है तो हमारे महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। वहीं कुछ विधायकों का तो यह भी कहना है कि सिंधिया जी को सीएम नहीं बनाया गया तो हम कमलनाथ की नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।
समर्थकों से नही मिले सिंधिया
अपनी मांग के साथ दिल्ली पहुंचे कांग्रेस विधायकों से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुलाकात नही की है। ऐसे में कुछ नेता निवास के बाहर धरने पर बैठ गए है तो वहीं कुछ विधायक दिल्ली स्तिथ मध्यप्रदेश निवास चले गए है और आगे की रणनीति बना रहे है। कांग्रेस के सिंधिया समर्थक विधायकों की इस मांग ने कांग्रेस के अंदर एक बार फिर तूफान खड़ा कर दिया है। अब कांग्रेस आलाकमान इसका क्या समाधान निकालेगा यह देखने वाली बात है।
