मध्यप्रदेश में सिंधिया समर्थक मंत्रियों की अनुमति के बिना ही उनके विभागों के फैसलों पर हो रहा है अमल

मध्यप्रदेश में सूखे राशन के होम डिलीवरी में बड़े स्तर पर अनिमितता की खबर है। सिंधिया के साथ भाजपा में आए मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की सहमति के बगैर पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय के फ़ाइल आगे बढ़ गए। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने 285 करोड़ का काम अलॉट करने के पहले सिसोदिया का मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं समझा। 

लॉकडाउन के बाद स्कूल बंद होने की स्थिति में केंद्र सरकार के निर्देशानुसार मिड-डे-मील की जगह सूखे राशन की होम डिलीवरी की जा रही है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्रालय के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने इससे संबंधित करीब 285 करोड़ का काम केंद्रीय भंडार को अलॉट किया है। लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है कि करोडों का काम देने से पहले विभाग के मंत्री तक से भ सहमति भी नहीं ली गई और फ़ाइल को आगे बढ़ा दिया गया।

मंत्री सिसोदिया को बाद में जब इस बात का पता चला तो उन्होंने नोट शीट जारी कर चीफ सेक्रेटरी से जवाब तलब किया है। सिसोदिया यह जानना चाहते हैं कि किस नियम के आधार पर केंद्रीय भंडार को यह कार्य सौंपा गया। सिसोदिया ने भी इस बात की पुष्टि भी की है कि उनकी सहमति के बिना फ़ाइल को आगे बढ़ाया गया है।

यह स्थिति सिर्फ ग्रामीण विकास मंत्रालय की नहीं है। सिंधिया समर्थक सभी मंत्रियों के विभाग में लगभग यही कहानी है। विभाग के अधिकारी ही मंत्रियों के बात नहीं सुनते। बिना सहमति के फाइलों को बढ़ा दिया जाता है। हालांकि, उन्होंने इस बात के बारे में कुछ नहीं कहा कि किसके इशारों पर ये अधिकारी काम कर रहे हैं।

बहरहाल, इस मामले के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि भाजपा में सिर्फ सिंधिया ही उपेक्षा के शिकार नहीं हो रहे हैं बल्कि पूरी सिंधिया समर्थकों को इससे गुजरना पड़ रहा है।

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